Shared Services Poem (SSP)
सधे हुए गजानन,
गहराई घनी पुष्कर सी |
मधुर स्वर श्रुति सा ,
आकर्षक तेज़ रुपाली |
साहस भरे पंकज
सिर पे कसा बन्दना,
और दूर चमकता दिव्यांशु |
सोंधी महक सौरभ सी,
प्राचीन हमारे संस्कार ,
शोहरत यश है बढ़ानी |
अजय रहे यह टीम दीवानी ,
यही अपूर्व दुआ है हमारी ||
गद गद हो गए सेठ िमोचा ,
ऐसी लहर पी टी अस में लगानी ||
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